Friday, December 19, 2025

वैदिक वास्तु शास्त्र :

वैदिक वास्तु शास्त्र : 

इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में बार-बार हो जाते हैं खराब ?

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, अथर्ववेद, बृहत्संहिता, मयमतम् तथा जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली एवं वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में इलेक्ट्रिकल सामग्री बार-बार खराब होने के कारण, दिशाएँ, लाभ-हानि, नियम एवं उपाय !

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान के बार - बार खराब होना अशुभ संकेत माना जाता है। 
भारतीय वैदिक परंपरा में घर को केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत ऊर्जा केंद्र माना गया है। 
अथर्ववेद, बृहत्संहिता, मयमतम् तथा वास्तुशास्त्र में यह वर्णित है कि प्रत्येक दिशा किसी न किसी देवशक्ति और पंचमहाभूत से संबंधित होती है। 
जब घर में इन दिशाओं का संतुलन बना रहता है, तब सुख, समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है। 
वहीं जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली के अनुसार यदि ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो तथा घर में वास्तु असंतुलन भी उपस्थित हो, तो जीवन में अनेक प्रकार की बाधाएँ दिखाई दे सकती हैं।
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में राहु के अशुभ प्रभाव और वास्तु दोष का कारण भी माना जाता है। 


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आज के समय में एक सामान्य समस्या यह देखने को मिलती है कि घर में पंखा, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, टीवी, इन्वर्टर, एसी, मोटर, मिक्सर, गीजर या अन्य विद्युत उपकरण बार-बार खराब हो जाते हैं। 
कई लोग इसे केवल तकनीकी खराबी मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसे वास्तु या ग्रहों से भी जोड़ते हैं। वैदिक दृष्टि से इन दोनों पहलुओं — व्यावहारिक और पारंपरिक — को साथ लेकर समझना अधिक उचित माना जाता है।
ऐसे में बार - बार रिपेयर करने या नया सामान खरीदने से आर्थिक नुकसान की स्थिति बनी रहती है।​वास्तु शास्त्र के अनुसार क्या आपके घर में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, इन्वर्टर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बार - बार खराब हो जाते हैं ? 
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष में इसे नकारात्मक ऊर्जा और खराब ग्रह दशा के संकेत के तौर पर देखा जाता है। 

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विद्युत उपकरणों का आध्यात्मिक एवं वास्तु महत्व :
वास्तुशास्त्र में बिजली अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। 
अग्नि ऊर्जा, शक्ति, तेज, उत्साह और परिवर्तन का प्रतीक है। 
यदि अग्नि तत्व संतुलित रहे तो घर में उन्नति, कार्यक्षमता और स्वास्थ्य में सहायता मिलती है। 
यदि इसका संतुलन बिगड़ जाए या विद्युत व्यवस्था बार-बार बाधित हो, तो इसे अग्नि तत्व की असंतुलित स्थिति का संकेत माना जाता है।
हालाँकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उपकरणों की खराबी का सबसे सामान्य कारण निम्न गुणवत्ता के उत्पाद, पुरानी वायरिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, नमी या रखरखाव की कमी भी हो सकते हैं।
माना जाता है कि बार - बार इलेक्ट्रॉनिक सामान का खराब होना राहु के अशुभ प्रभाव और वास्तु दोष का संकेत हो सकता है। 
घर में ऊर्जा के असंतुलन का सीधा असर घर की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर पड़ता है। 
वास्तु के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अग्नि तत्त्व से जुड़े होते हैं, इस लिए इन्हें सही दिशा में न रखने पर घर के ऊर्जा संतुलन में बाधा आती है।

घर की दक्षिण - पूर्व दिशा का वास्तु उपाय :

वास्तु शास्त्र के अनुसार राहु को बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ा ग्रह माना जाता है। 
अगर कुंडली में राहु अशुभ हो तो घर में इलेक्ट्रॉनिक सामान तेजी से खराब होने लगते हैं। 

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जन्मकुंडली एवं प्रश्नकुंडली का संबंध :

वैदिक ज्योतिष में सूर्य, मंगल, राहु और शनि का विद्युत, ऊर्जा तथा मशीनों से विशेष संबंध माना जाता है।

- सूर्य ऊर्जा और प्रकाश का कारक है।
- मंगल अग्नि, मशीनरी और तकनीकी उपकरणों का प्रतिनिधित्व करता है।
- राहु आधुनिक तकनीक, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक साधनों से जुड़ा माना जाता है।
- शनि मशीनों, धातु और दीर्घकालिक उपयोग वाली वस्तुओं का कारक माना जाता है।

यदि जन्मकुंडली में ये ग्रह पीड़ित हों, या उनकी महादशा - अंतरदशा प्रतिकूल हो, तो व्यक्ति को मशीनों की खराबी, विद्युत बाधाओं या अनावश्यक खर्च का अनुभव हो सकता है। 
प्रश्नकुंडली में भी ऐसे योगों का अध्ययन विशेष परिस्थिति में किया जाता है।
किस दिशा में इलेक्ट्रिकल सामग्री रखना शुभ माना जाता है?
वास्तु परंपरा के अनुसार अग्नि तत्व से संबंधित विद्युत उपकरणों के लिए दक्षिण - पूर्व (आग्नेय कोण ) सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
यदि यह संभव न हो, तो कुछ उपकरण आवश्यकता अनुसार दक्षिण दिशा या पश्चिम दिशा में भी रखे जा सकते हैं, परंतु भारी विद्युत नियंत्रण पैनल, इन्वर्टर या मुख्य विद्युत व्यवस्था को ईशान कोण में रखने से सामान्यतः बचने की सलाह दी जाती है।
ऐसे में अचानक शॉर्ट सर्किट या बार - बार रिपेयर करने की जरूरत पड़ने लगती है। 
यह स्थिति धीरे - धीरे मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी का कारण भी बन सकती है। 
घर में खराब या टूटे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान का होना राहु दोष का संकेत माना जाता है, जो धन हानि का कारण बनता है।


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वास्तु दोष और राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के उपाय :

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पड़ा फ्यूज बल्ब, टूटा चार्जर, खराब मोबाइल और खराब गैजेट तुरंत रिपेयर करवा लें या घर से बाहर निकाल दें। 
ये घर में वास्तु दोष का कारण माने जाते हैं।
हफ्ते में एक दिन घर में नमक मिले पानी से पोछा लगाएं। 
बार-बार इलेक्ट्रिकल सामग्री खराब होने के संभावित कारण

यदि घर में कई उपकरण लगातार खराब हो रहे हों, तो निम्न कारणों की जाँच अवश्य करें—

- वोल्टेज का लगातार कम या अधिक होना।
- अर्थिंग ( Earthing ) की खराब व्यवस्था।
- निम्न गुणवत्ता की वायरिंग।
- ओवरलोड विद्युत लाइन।
- पुराना एमसीबी या स्विच।
- नमी या पानी का रिसाव।
- बिजली गिरने या सर्ज से सुरक्षा का अभाव।
- अनुचित रखरखाव।

इन तकनीकी कारणों का समाधान किसी योग्य इलेक्ट्रिशियन से कराना सबसे आवश्यक है।

पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के अनुसार संभावित संकेत :

यदि तकनीकी कारण न हों और समस्या बार - बार बनी रहे, तो कुछ लोग इसे निम्न प्रकार से देखते हैं—

- घर में अग्नि तत्व का असंतुलन।
- वास्तु दोष।
- ग्रहों की प्रतिकूल दशा।
- लंबे समय से टूटी या खराब वस्तुओं का संग्रह।
- घर में अव्यवस्था और नकारात्मक वातावरण।

ये आध्यात्मिक एवं पारंपरिक मान्यताएँ हैं; इन्हें निश्चित कारण नहीं माना जाना चाहिए।
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संभावित लाभ ( यदि व्यवस्था संतुलित हो ) :

- विद्युत उपकरण अधिक समय तक सुचारु रूप से चल सकते हैं।
- अनावश्यक खर्च में कमी आ सकती है।
- कार्यों में सुविधा बढ़ती है।
- घर का वातावरण व्यवस्थित रहता है।
- मानसिक संतोष और सकारात्मकता का अनुभव होता है।

संभावित हानियाँ ( यदि उपेक्षा की जाए ) :

- बार-बार मरम्मत का खर्च।
- अचानक उपकरण बंद हो जाना।
- कार्यों में रुकावट।
- बिजली से दुर्घटना का जोखिम।
- मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव।

माना जाता है कि इस से घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
फ्रिज, माइक्रोवेव, मिक्सर, गीजर, टीवी जैसे भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को दक्षिण - पूर्व दिशा में रखें। 
उत्तर - पूर्व दिशा में अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखना आपके परेशानी का कारण ब सकते हैं।

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु को शांत करने के लिए शुक्रवार या शनिवार के दिन काले या सफेद कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।
शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे के पास सरसों तेल या तिल के तेल का दीपक जलाएं। 

वास्तु एवं आध्यात्मिक उपाय :

1. घर की मुख्य विद्युत व्यवस्था की समय-समय पर जाँच कराएँ।
2. अर्थिंग और वायरिंग को सुरक्षित रखें।
3. आग्नेय कोण को स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
4. टूटे हुए स्विच, बोर्ड और तार तुरंत बदलें।
5. खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान लंबे समय तक घर में जमा न रखें।
6. प्रतिदिन प्रातः सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
7. रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
8. मंगलवार को श्री हनुमानजी की आराधना करें।
9. यदि कुंडली में शनि या राहु पीड़ित हों, तो योग्य विद्वान से परामर्श लेकर ही ग्रह शांति के उपाय करें।
10. घर में स्वच्छता, प्रकाश और उचित वायु संचार बनाए रखें।
11. बिजली के उपकरणों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सर्ज प्रोटेक्टर और स्टेबलाइज़र का उपयोग करें।
12. समय-समय पर सभी उपकरणों की सर्विस कराएँ।

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महत्वपूर्ण सावधानी :

केवल यह मान लेना कि इलेक्ट्रिकल सामग्री बार-बार खराब हो रही है इसलिए अवश्य ही कोई वास्तुदोष या ग्रहदोष है—
ऐसा निष्कर्ष उचित नहीं है। 
सबसे पहले तकनीकी कारणों की जाँच करें। यदि सब कुछ ठीक होने पर भी लगातार असामान्य समस्याएँ बनी रहें, तब जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और वास्तु का समग्र अध्ययन किसी अनुभवी विद्वान से कराया जा सकता है।
इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होने लगती है।
नया इलेक्ट्रॉनिक सामान चालू करने से पहले हल्दी या कुंकुम का तिलक करें और उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं।
अथर्ववेद, बृहत्संहिता, मयमतम् तथा भारतीय वास्तु परंपरा के अनुसार अग्नि तत्व से संबंधित वस्तुओं का उचित स्थान और संतुलन महत्वपूर्ण माना गया है। 
वहीं वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य, मंगल, राहु और शनि जैसे ग्रह ऊर्जा, मशीनों और तकनीकी साधनों पर सांकेतिक प्रभाव रखते हैं। 
फिर भी जीवन की हर समस्या का कारण केवल ग्रह या वास्तु नहीं होते। 
विद्युत उपकरणों की गुणवत्ता, वायरिंग, अर्थिंग, रखरखाव और सुरक्षित उपयोग भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
अतः यदि घर में इलेक्ट्रिकल सामग्री बार-बार खराब हो रही हो, तो पहले योग्य इलेक्ट्रिशियन से संपूर्ण जाँच कराएँ। 
इसके साथ घर को स्वच्छ, व्यवस्थित और संतुलित रखें, अग्नि तत्व का सम्मान करें, नियमित ईश्वर स्मरण करें तथा यदि आवश्यक हो तो जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली के आधार पर योग्य वैदिक ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत परामर्श लेकर ही उपाय करें। 
यही संतुलित दृष्टिकोण परिवार में सुख, सुरक्षा, समृद्धि और मानसिक शांति का आधार बनता है।

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जब ग्रहदशा प्रतिकूल हो भूखण्ड का आकार व्यक्ति के भाग्य को प्रभावित करता है :

वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार वर्गाकार भूखण्ड, आयताकार भूखण्ड, गोलाकार भूखण्ड और त्रिकोणाकार भूखण्ड जानने के बाद चक्राकार भूखण्ड, शकटाकार भूखण्ड, पंखाकार भूखण्ड, तबलाकार भूखण्ड और शूर्पाकार भूखण्ड को भी समझना आवश्यक है, क्योंकि भूखण्ड के आकार का प्रभाव व्यक्ति की ग्रहदशा एवं भाग्य पर पड़ता है।

तख्ताकार भूखण्ड- 

तख्ताकार भूखण्ड- जहां आयताकार भूखण्ड में लंबाई और चौड़ाई को 2:1 होना काफी अच्छा माना गया है...! 

2:1 अनुपात का मतलब, जैसे लम्बाई अगर 20 फिट हो, तो चौड़ाई 10 फिट होनी चाहिए..! 

वहीं तख्ताकार भूखण्ड में भूमि की लंबाई और चौड़ाई 3:1 के अंतर में होती है। 


ऐसी भूमि वास्तु नियमों के अनुसार ग्राह्म तो हैं परंतु ऐसा देखा गया है कि तख्ताकार भूखण्ड में ब्रह्म स्थान में दो दिशाएं नजदीक और दो दिशाएं दूर होने से घर के सदस्यों के बीच एकमत नहीं रहता। 

ग्रहदशा में बलवान होने पर ऐसी भूमि पर बने मकान में रहने वाले का स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति एक जैसी नहीं रहती है, कभी शुभ तो कभी अशुभ होता रहता है।

शकटाकार भूखण्ड- 

शकटाकार भूखण्ड- शकटाकार भूखंड देखने में रथ अथवा बैलगाड़ी के आकार के समान दिखाई देता है। 
वास्तु अनुसार इस भूखंड पर भवन निर्माण करना अशुभ फलदायक होता है। 
जिसके पास यह भूखण्ड हो, वह आवश्यकता पड़ने पर इसे गोदाम के रूप में प्रयोग कर सकता है।

चक्राकार भूखण्ड-

चक्राकार भूखण्ड- चक्राकार भूमि वह होती है जो देखने में पहिए यानी चक्र की तरह होती है यह भूमि गोल यानी वृत नहीं होती है...! 
लेकिन थोड़ी बहुत वैसे ही आकार की कही जा सकती है परंतु जहां एक ओर वृत्ताकार भूमि शुभ होती है, वहीं दूसरी ओर चक्राकार भूमि अशुभ कहलाती है। 
इस भूखंड पर भवन निर्माण करके निवास करने पर अगर भूमि मालिक अथवा उसमें रहने वालों की ग्रहदशा कमजोर हो तो उन्हें निर्धनता, कष्ट, क्लेश, रोग, बीमारियां आदि झेलनी पड़ती है..! 
इस लिए इस भूमि को हानिकारक माना गया है।

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मृदंग/तबलाकार भूखण्ड- 

मृदंग/तबलाकार भूखण्ड- जो भूखण्ड मृदंग या ढोलक, तबले के आकार के समान दिखाई पड़ता है, उसे तबला कारक या मृदंगाकार भूखंड कहा जाता है। 
इस भूखंड पर निवास करने से भूस्वामी पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। 
मृदंग आकार भूखंड स्त्रियों के लिए अशुभ माना गया है।

शूर्पाकार भूखण्ड- 

शूर्पाकार भूखण्ड - छाजन या शूर्प के आकार की भूमि शूर्पाकार कहलाती हैं, इस प्रकार के भूखण्ड पर भूस्वामी का निवास करना अशुभ होता है..! 
भूस्वामी का आय से ज्यादा व्यय रहता हैं, जन्मपत्री में अशुभ ग्रहों की दशा आने पर इस भूमि का वास्तुदोष धन सम्पत्ति टिकने नहीं देता है।

पंखाकार भूखण्ड- 

पंखाकार भूखण्ड- पंखाकार भूखंड हाथ के पंखे के आकार के समान दिखाई देता है। 
यह भूमि भी भूस्वामी की ग्रहदशा विपरीत होने पर भूस्वामी के लिए अशुभ, कष्टकारक, धन नाशक होती है।

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!!!!! शुभमस्तु !!!

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
Shri Maha Prabhuji bethak Road,
JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
सेल नंबर: . + 91- 9427236337 / + 91- 9426633096  ( GUJARAT )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏
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