दुर्भाग्य नहीं छोड़ रहा पीछा, तो रोजाना इन कामों से बदल सकती है किस्मत :
दुर्भाग्य नहीं छोड़ रहा पीछा, तो रोजाना इन कामों से बदल सकती है किस्मत :
ज्योतिष शास्त्र और वास्तु शास्त्र में दुर्भाग्य से मुक्ति पाने के कई सरल उपाय बताए गए हैं।
दुर्भाग्य नहीं छोड़ रहा पीछा तो घर, कार्यालय एवं शोरूम में अवश्य करें ये वैदिक उपाय !
इन उपायों को रोजाना करने से आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है।
ऐसे में चलिए जानते हैं कि आपको रोजाना किन कार्यों को करना चाहिए।
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री वास्तुशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण एवं श्री अग्नि पुराण सहित वैदिक परंपरा के अनुसार जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली एवं गोचर के ग्रहों के आधार पर विस्तृत विवेचन में दुर्भाग्य के कारण करना पड़ता है कई मुसीबतों का सामना।
+++
+++
ज्योतिष और ज्योतिष में बताए गए हैं इसके कुछ उपाय।
मनुष्य के जीवन में ऐसा समय भी आता है जब भरपूर परिश्रम करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती।
व्यापार में लगातार हानि होती है, नौकरी में उन्नति रुक जाती है, घर में कलह बनी रहती है, रोग, ऋण और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।
अनेक लोग इसे केवल दुर्भाग्य मानते हैं, जबकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं —
जन्मकुंडली में ग्रहदोष, वर्तमान दशा, गोचर, वास्तुदोष, अथवा स्वयं के कर्म।
घर से नकारात्मक चीजों को हटाने से मिल सकता है फायदा।
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र में इससे संबंधित कई उपाय बताए गए हैं, जिनकी मदद से आप अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हैं।
8-Inch Plain Brass Pooja Thali Set with Diyas, Kumkum Bowls, Agarbatti Stand & Accessories
Brand: NEETU ARTS https://amzn.to/4a8HTm5
{ Complete Pooja Set – Includes 1 thali, 2 diyas, kumkum bowls, agarbatti stand, panchpatra with spoon, kapoor aarti, and a bell.
- Ideal for Daily Worship – Perfect for home temples, religious ceremonies, and spiritual rituals.
- Traditional & Functional – Thoughtfully designed for convenience and devotional use.
- Compact & Durable – 8-inch thali with finely crafted accessories for long-term use.
- Great for Gifting – An excellent gift for housewarming, weddings, festivals, and religious events. }
ऋग्वेद और यजुर्वेद में मनुष्य को सत्य, यज्ञ, दान, सेवा और ईश्वर - उपासना का मार्ग अपनाने का उपदेश दिया गया है।
पुराणों में भी बार - बार बताया गया है कि धर्मयुक्त आचरण से जीवन के संकट कम होते हैं।
इस लिए किसी भी उपाय को चमत्कार नहीं, बल्कि श्रद्धा, सदाचार और पुरुषार्थ के साथ अपनाना चाहिए।
कई कोशिशों के बाद भी कुछ लोगों का दुर्भाग्य उनका पीछा नहीं छोड़ता।
ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे काम बताने जा रहे हैं, जिन्हें यदि आप रोजाना करते हैं, तो इससे आपको अपने दुर्भाग्य से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
दुर्भाग्य के प्रमुख संकेत
यदि लंबे समय तक निम्न स्थितियाँ बनी रहें, तो समग्र वैदिक परीक्षण आवश्यक हो सकता है—
- बिना कारण कार्यों का बार-बार रुक जाना।
- व्यापार में लगातार नुकसान।
- धन आते ही अनावश्यक खर्च हो जाना।
- परिवार में निरंतर विवाद।
- मानसिक अशांति और भय।
- न्यायालय, ऋण या शत्रु संबंधी परेशानियाँ।
- घर या कार्यालय में नकारात्मक वातावरण का अनुभव।
- बार-बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ।
इन परिस्थितियों में केवल एक कारण को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर और वास्तु का संयुक्त अध्ययन अधिक उपयोगी माना जाता है।
+++
+++
रोजाना जरूर करें ये काम :
रोजाना पूरे श्रद्धाभाव के साथ अपने इष्ट देव की पूजा - अर्चना करें।
विशेषकर रोजाना खासकर मंगलवार व शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा - अर्चना जरूर करें।
हनुमान जी को कलयुग का जागृत देव माना गया है।
ऐसे में हनुमान जी की पूजा - अर्चना से आपके अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं और कार्य में सफलता प्राप्ति की संभावना बढ़ जाती है।
इस के साथ ही रोजाना गायत्री मंत्र के जप से भी आपको विशेष लाभ मिल सकता है।
इस से घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है।
जन्मकुंडली का महत्व :
यदि जन्मकुंडली में भाग्यभाव, कर्मभाव, धनभाव या लाभभाव पीड़ित हों, अथवा शनि, राहु, केतु या मंगल के कारण विशेष योग बन रहे हों, तो व्यक्ति को संघर्ष अधिक करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, शुभ ग्रहों की दृष्टि और अनुकूल दशा कठिन समय को भी बदल सकती है।
+++
+++
दूर होगा दुर्भाग्य :
दुर्भाग्य से मुक्ति पाने के लिए रोजाना सूर्य देव को जल भी जरूर अर्पित करना चाहिए।
जल अर्पित करते समय "ॐ सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें।
इस के साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार, दान - पुण्य करने और अच्छे कर्म करने से देवी - देवताओं का आशीर्वाद आपके ऊपर बना रहता है, जिससे दुर्भाग्य की स्थिति दूर हो सकती है।
प्रश्नकुंडली और गोचर :
कई बार जन्मकुंडली सामान्य होती है, पर वर्तमान गोचर या दशा चुनौतीपूर्ण होती है।
प्रश्नकुंडली वर्तमान समय की दिशा समझने में सहायक मानी जाती है।
इस लिए उचित समय का निर्णय भी महत्वपूर्ण है।
घर में अपनाने योग्य वैदिक एवं वास्तु संबंधी उपाय :
1. प्रतिदिन प्रातः घर की स्वच्छता रखें।
2. पूजा स्थान को सदैव स्वच्छ एवं पवित्र रखें।
3. प्रातः और सायं दीपक जलाकर ईश्वर का स्मरण करें।
4. घर में कटु वचन और निरंतर विवाद से बचें।
5. नियमित रूप से धूप या सुगंधित वातावरण बनाए रखें।
6. तुलसी का सम्मानपूर्वक पालन करें जहाँ संभव और उपयुक्त हो।
7. माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करें।
+++
+++
घर से हटाएं ये चीजें :
अपने घर से पुरानी, बेकार पड़ी या टूटी हुई वस्तुओं को हटा देना चाहिए।
इस के साथ ही बेकार पड़े जूते और बंद घड़ी को भी घर से बाहर कर देना चाहिए, क्योंकि ये चीजें नकारात्मकता को बढ़ाती हैं, जिससे दुर्भाग्य को बढ़ावा मिलता है।
कार्यालय एवं शोरूम के लिए :
- प्रवेश द्वार स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
- ग्राहकों के साथ मधुर व्यवहार करें।
- व्यापार में छल-कपट से बचें।
- प्रतिदिन कार्य आरंभ करने से पहले ईश्वर का स्मरण करें।
- कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार रखें।
- आय-व्यय का पारदर्शी लेखा रखें।
+++
+++
शुभ नियम :
- सत्य बोलें।
- समय का पालन करें।
- अनुचित धन से बचें।
- गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करें।
- क्रोध और अहंकार पर नियंत्रण रखें।
- प्रतिदिन कुछ समय प्रार्थना या ध्यान करें।
इस के साथ ही घर में खंडित देवी - देवताओं की मूर्ति रखना भी बिल्कुल शुभ नहीं माना गया।
आप इन्हें क्षमा - याचना करते हुए किसी साफ नदी या तालाब में प्रवाहित कर सकते हैं, जिससे आपको दोष का सामना नहीं करना पड़ता।
दक्षिण दिशा भी होती है शुभ :
इन आसान वास्तु उपायों से घर में बनी रहेगी सुख - समृद्धि और बढ़ेगी बरकत दक्षिण दिशा भी होती है शुभ...!
वास्तुशास्त्र में खास दक्षिण दिशा का महत्व होता है।
इस दिशा से जुड़े नियमों का ख्याल रखने से घर में बरकत होती है और सुख - समृद्धि बनी रहती है।
लेकिन दक्षिण मुखी घर को एक बड़ा वास्तुदोष माना गया है।
ऐसे में अगर आप दक्षिण दिशा में वास्तु के कुछ उपाय कर लें तो इससे जीवन में तरक्की प्राप्त हो सकती है और घर की समस्याएं भी दूर होने लगती हैं...!
वास्तुशास्त्र में हर दिशा का खास महत्व होता है।
श्रद्धा के साथ निम्न उपाय किए जा सकते हैं—
- ॐ गं गणपतये नमः का 108 बार जप।
- ॐ नमः शिवाय का नियमित जप।
- शनिवार को शनिदेव का स्मरण तथा तिल के तेल का दीपक।
- सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक।
- गुरुवार को भगवान विष्णु एवं बृहस्पति की पूजा।
- यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और गौसेवा का दान।
- पक्षियों और पशुओं को भोजन कराना।
- धर्मग्रंथों का नियमित अध्ययन या श्रवण।
वास्तुशास्त्र में खास दक्षिण दिशा का महत्व होता है।
इस दिशा से जुड़े नियमों का ख्याल रखने से घर में बरकत होती है और सुख - समृद्धि बनी रहती है।
लेकिन दक्षिण मुखी घर को एक बड़ा वास्तुदोष माना गया है।
ऐसे में अगर आप दक्षिण दिशा में वास्तु के कुछ उपाय कर लें तो इससे जीवन में तरक्की प्राप्त हो सकती है और घर की समस्याएं भी दूर होने लगती हैं...!
वास्तुशास्त्र में हर दिशा का खास महत्व होता है।
इस दिशा से जुड़े नियमों का ख्याल रखने से घर में बरकत होती है और सुख - समृद्धि बनी रहती है।
लेकिन दक्षिण मुखी घर को एक बड़ा वास्तुदोष माना गया है।
ऐसे में अगर आप दक्षिण दिशा में वास्तु के कुछ उपाय कर लें तो इससे जीवन में तरक्की प्राप्त हो सकती है और घर की समस्याएं भी दूर होने लगती हैं...!
वास्तुशास्त्र में हर दिशा का खास महत्व होता है।
श्रद्धा के साथ निम्न उपाय किए जा सकते हैं—
- ॐ गं गणपतये नमः का 108 बार जप।
- ॐ नमः शिवाय का नियमित जप।
- शनिवार को शनिदेव का स्मरण तथा तिल के तेल का दीपक।
- सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक।
- गुरुवार को भगवान विष्णु एवं बृहस्पति की पूजा।
- यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और गौसेवा का दान।
- पक्षियों और पशुओं को भोजन कराना।
- धर्मग्रंथों का नियमित अध्ययन या श्रवण।
- ॐ गं गणपतये नमः का 108 बार जप।
- ॐ नमः शिवाय का नियमित जप।
- शनिवार को शनिदेव का स्मरण तथा तिल के तेल का दीपक।
- सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक।
- गुरुवार को भगवान विष्णु एवं बृहस्पति की पूजा।
- यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और गौसेवा का दान।
- पक्षियों और पशुओं को भोजन कराना।
- धर्मग्रंथों का नियमित अध्ययन या श्रवण।
+++
+++
घर बनवाते समय, फर्नीचर रखते समय या कोई पेंटिंग लगाते वक्त दिशा का ख्याल रखना बहुत जरूरी माना जाता है।
इस से घर में कभी भी वास्तुदोष नहीं लगता है।
लेकिन अगर किसी के घर का मेन गेट दक्षिण दिशा में हो तो इसे एक बड़ा वास्तुदोष माना जाता है।
इस से घर में कभी भी वास्तुदोष नहीं लगता है।
लेकिन अगर किसी के घर का मेन गेट दक्षिण दिशा में हो तो इसे एक बड़ा वास्तुदोष माना जाता है।
किन बातों से बचें :
- असत्य और धोखाधड़ी।
- नशा और हिंसा।
- माता-पिता का अपमान।
- गुरु का अनादर।
- अन्यायपूर्वक धन अर्जित करना।
- निराशा में पुरुषार्थ छोड़ देना।
हालांकि, वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा को भी बहुत शुभ माना गया है।
इस ओर कुछ चीजों को बनवाने, रखने और छोटे - छोटे उपाय करने से दक्षिण मुखी घर में भी सुख - समृद्धि, शांति, स्वस्थ और संपन्न जीवन व्यतीत किया जा सकता है।
तो आइए जानते हैं कि दक्षिण दिशा में वास्तु के अनुसार कौन - कौन से कार्य और उपाय करने से घर में बरकत बढ़ सकती है।
वास्तविक भाग्योदय का रहस्य :
वास्तु केवल सहायक है, ज्योतिष केवल मार्गदर्शक है और उपाय केवल प्रेरक हैं।
यदि व्यक्ति स्वयं परिश्रम नहीं करता, तो केवल उपायों से स्थायी सफलता की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
इसी प्रकार यदि व्यक्ति सत्य, सेवा, संयम और ईश्वर - भक्ति के साथ निरंतर कर्म करता है, तो कठिन समय भी धीरे - धीरे बदल सकता है।
यदि दुर्भाग्य आपका पीछा नहीं छोड़ रहा है, तो सबसे पहले घबराएँ नहीं। अपनी जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, वर्तमान गोचर और घर या कार्यस्थल की वास्तु स्थिति का समग्र परीक्षण कराएँ।
उसके बाद श्रद्धा के साथ वैदिक उपाय अपनाएँ, सदाचारपूर्ण जीवन जिएँ और निरंतर पुरुषार्थ करते रहें।
वेद और पुराणों का सार यही है कि धर्मयुक्त कर्म, ईश्वर में श्रद्धा, सेवा, दान, सत्य और संयम मनुष्य के जीवन में शुभ परिवर्तन का आधार बनते हैं।
ग्रह परिस्थितियाँ बना सकते हैं, परंतु श्रेष्ठ कर्म उन परिस्थितियों का श्रेष्ठ उपयोग करना सिखाते हैं।
ईश्वर पर विश्वास रखें, अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाइए, घर और कार्यस्थल को पवित्र रखिए तथा धर्म के मार्ग पर चलते हुए धैर्यपूर्वक आगे बढ़िए। यही स्थायी भाग्योदय का सर्वोत्तम उपाय है।
+++
+++
दक्षिण दिशा के इन नियमों का ध्यान रखने से होगा लाभ :
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली एवं गोचर के अनुसार घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम और दुकान में दक्षिण दिशा का महत्व, नियम, फल एवं उपाय !
वास्तुशास्त्र के अनुसार, दक्षिण मुखी घर ,कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम और दुकान होने पर पानी की टंकी, रसोई घर, टॉयलेट, बाथरूम और पानी की टंकी सही स्थान पर सही दिशा में होने चाहिए।
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री वास्तुशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण तथा श्री अग्नि पुराण सहित अनेक वैदिक ग्रंथों में दिशाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा किसी न किसी देवता तथा ग्रह से संबंधित मानी गई है।
दक्षिण दिशा का स्वामी यमदेव माने जाते हैं, जबकि ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिशा का संबंध मुख्यतः मंगल तथा पितृ ऊर्जा से भी माना जाता है।
यदि जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली अथवा गोचर में दक्षिण दिशा प्रभावित हो, तो जीवन में संघर्ष, आर्थिक हानि, रोग, विवाद तथा मानसिक तनाव बढ़ सकते हैं।
वहीं उचित नियमों का पालन करने पर स्थिरता, सुरक्षा, साहस और धन की रक्षा होती है।
घर में दक्षिण दिशा सदैव भारी एवं मजबूत रखनी चाहिए।
इस दिशा में मजबूत दीवार, भारी फर्नीचर, अलमारी, तिजोरी ( यदि उसका मुख उत्तर की ओर खुले ), महत्वपूर्ण दस्तावेज़ रखने की व्यवस्था शुभ मानी जाती है।
दक्षिण दिशा में गड्ढा, खुला स्थान, टूटी हुई दीवार, सीलन, कूड़ा-कचरा अथवा अनुपयोगी वस्तुएँ नहीं रखनी चाहिए।
इस से परिवार में रोग, धनहानि और मानसिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।
साथ ही, पूर्व और उत्तर दिशा का ज्यादा से ज्यादा खाली रखने का प्रयास करना चाहिए।
यदि दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार हो तो जन्मकुंडली और वास्तु के अनुसार उसका विशेष परीक्षण आवश्यक होता है।
बिना विचार के किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं करना चाहिए।
योग्य ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उपाय करना उचित रहता है।
+++
+++
कार्यालय ( ऑफिस ) में दक्षिण दिशा का भाग मजबूत एवं व्यवस्थित होना चाहिए।
कार्यालय के स्वामी का बैठने का स्थान ऐसा हो कि उनका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहे तथा उनकी पीठ दक्षिण दिशा की ओर हो।
इस से निर्णय क्षमता, अधिकार और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
दक्षिण दिशा में फाइलों का व्यवस्थित संग्रह, मजबूत अलमारी तथा आवश्यक रिकॉर्ड रखना शुभ माना गया है।
वास्तु के इन नियमों का ध्यान रखने से घर में हमेशा सुख - समृद्धि और शांति बनी रहती है।
परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम देखने को मिलता है और जीवन में तरक्की के नए मार्ग खुलते हैं।
मोटरसाइकिल या वाहन शोरूम में दक्षिण दिशा में भारी वाहन, स्पेयर पार्ट्स अथवा गोदाम रखना लाभकारी माना जाता है।
इस दिशा में टूटे - फूटे वाहन, कबाड़ या अनुपयोगी सामान लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए।
इस से व्यापार की गति धीमी पड़ सकती है तथा ग्राहकों की संख्या में कमी आ सकती है।
शोरूम का स्वागत क्षेत्र उत्तर या पूर्व दिशा में अधिक शुभ माना जाता है।
दक्षिण मुखी घर में जरूर करें ये उपाय :
दुकान में दक्षिण दिशा की दीवार मजबूत होनी चाहिए।
दुकान का मालिक यदि दक्षिण - पश्चिम भाग में बैठकर उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके व्यापार करे तो स्थिर लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है।
दक्षिण दिशा में भारी सामान रखना शुभ माना जाता है, जबकि हल्का सामान, खाली रैक या कूड़ादान रखना उचित नहीं माना जाता।
जन्मकुंडली में यदि मंगल, शनि, राहु या केतु दक्षिण दिशा से संबंधित भावों को प्रभावित कर रहे हों, अथवा प्रश्नकुंडली में दक्षिण दिशा दोष का संकेत मिले, तो वास्तु के साथ ज्योतिषीय उपाय भी आवश्यक हो जाते हैं।
केवल वास्तु परिवर्तन से हर समस्या समाप्त नहीं होती; ग्रहों की शांति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस दिशा में आप पत्थरों की दीवार खड़ी करवाने के बाद उस पर लाल फूलों की बेल रख सकते हैं।
इस के अलावा, दीवार को लाल रंग से पेंट करना भी शुभ रहेगा।
+++
+++
गोचर में यदि शनि, मंगल या राहु प्रतिकूल प्रभाव दे रहे हों, तो दक्षिण दिशा की स्वच्छता, अनुशासन और भार संतुलन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
इस समय किसी भी प्रकार की तोड़ - फोड़, गंदगी या अव्यवस्था से बचना चाहिए।
दक्षिण मुखी घर होने पर आप इस दिशा की भूमि के अंदर तांबे का तार बिछा सकते हैं।
साथ ही, दक्षिण दिशा में भगवान हनुमान या कालभैरव की तस्वीर लगाई जा सकती है।
दक्षिण दिशा के प्रमुख नियम :
- दक्षिण दिशा सदैव स्वच्छ, मजबूत और व्यवस्थित रखें।
- टूटी हुई वस्तुएँ, कबाड़ और अनुपयोगी सामान तुरंत हटाएँ।
- भारी वस्तुएँ दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें।
- दक्षिण दिशा में जल स्रोत, गड्ढा या रिसाव न हो।
- नियमित रूप से दीपक या धूप जलाकर स्थान को सात्त्विक बनाएँ।
- पितरों का सम्मान करें तथा समय-समय पर श्राद्ध एवं तर्पण करें।
+++
+++
दक्षिण दिशा के शुभ उपाय :
- प्रत्येक मंगलवार हनुमानजी की पूजा करें।
- "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" मंत्र का जप करें यदि मंगल अशुभ हो।
- शनिवार को शनि संबंधित दान एवं सेवा करें यदि शनि पीड़ित हो।
- पितृ दोष होने पर अमावस्या के दिन तर्पण तथा योग्य विद्वान के मार्गदर्शन में पितृ शांति कराएँ।
- घर, दुकान या कार्यालय की दक्षिण दिशा में सदैव स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
- वास्तु परिवर्तन केवल जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और वर्तमान गोचर का सम्यक् विचार करके ही करें।
इस से घर से नकारात्मक ऊर्जा और शक्तियां दूर होती हैं।
इस के अलावा, तांबे पर मंगल यंत्र बनवाकर दक्षिणी दीवार या दरवाजे पर लगाया जा सकता है।
+++
+++
अंततः यह समझना आवश्यक है कि वास्तुशास्त्र, ज्योतिषशास्त्र और धर्मशास्त्र एक - दूसरे के पूरक हैं।
केवल दिशा बदलने से भाग्य नहीं बदलता और केवल ग्रहों की पूजा से भी सभी वास्तुदोष समाप्त नहीं होते।
जब जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, गोचर, वास्तु और सदाचार —
इन पाँचों का संतुलन स्थापित होता है, तब घर में सुख - शांति, कार्यालय में उन्नति, दुकान में ग्राहकों की वृद्धि तथा व्यापार में स्थायी सफलता प्राप्त होने की संभावना प्रबल होती है।
यही वैदिक परंपरा का समन्वित संदेश है।
साथ ही, इस दीवार पर कम से कम खिड़की या दरवाजे बनवाने चाहिए।
वास्तु के ये उपाय करने से घर में बरकत होती है और तिजोरी हमेशा धन से भरी रह सकती है।
दक्षिण मुखी मकान में कर सकते हैं ये काम :
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, श्री खगोलशास्त्र, श्री वास्तुशास्त्र, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण एवं श्री अग्नि पुराण के अनुसार दक्षिणमुखी घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम एवं दुकान का महत्व, फल, नियम एवं उपाय !
भारतीय वैदिक परंपरा में यह धारणा प्रचलित है कि दक्षिणमुखी घर, दुकान अथवा कार्यालय सदैव अशुभ होते हैं, किन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है।
वैदिक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र तथा अनेक प्राचीन ग्रंथों के अनुसार किसी भवन का शुभ या अशुभ होना केवल उसके मुख की दिशा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, वर्तमान गोचर, भूखंड की संरचना, प्रवेश द्वार की स्थिति तथा भवन के भीतर ऊर्जा के संतुलन पर भी निर्भर करता है।
दक्षिण दिशा का संबंध स्थिरता, अनुशासन, परिश्रम, सुरक्षा तथा कर्मफल से माना जाता है।
इस दिशा के अधिष्ठाता यमदेव माने जाते हैं, जो न्याय और धर्म के प्रतीक हैं।
अतः दक्षिणमुखी भवन में रहने या व्यापार करने वाला व्यक्ति यदि सत्य, ईमानदारी और अनुशासन का पालन करता है, तो उसे शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में मंगल, सूर्य अथवा शनि विशेष योगकारक हों और दक्षिण दिशा अनुकूल हो, तो दक्षिणमुखी भवन भी उन्नति, साहस, प्रतिष्ठा तथा आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकता है।
इस लिए केवल दिशा देखकर निर्णय लेना उचित नहीं माना गया है।
वास्तुशास्त्र के अनुसार, अगर कोई मकान दक्षिण मुखी हो तो उसमें होटल, टायर, रसायन, हार्डवेयर, ब्यूटी पार्लर, तेल आदि की दुकान की जा सकती है।
दक्षिणमुखी घर में क्या किया जा सकता है ?
दक्षिणमुखी घर में परिवार सुखपूर्वक रह सकता है, यदि घर का वास्तु संतुलित हो।
घर के दक्षिण और दक्षिण - पश्चिम भाग को मजबूत एवं ऊँचा रखना शुभ माना जाता है।
इस भाग में मास्टर बेडरूम, मजबूत अलमारी, तिजोरी ( जिसका मुख उत्तर की ओर खुले ), महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा भारी सामान रखा जा सकता है।
पूजा कक्ष उत्तर - पूर्व ( ईशान ) दिशा में रखना अधिक शुभ माना जाता है।
रसोईघर दक्षिण - पूर्व (आग्नेय ) दिशा में हो तो उत्तम रहता है। उत्तर एवं पूर्व दिशा को खुला, स्वच्छ और प्रकाशयुक्त रखना चाहिए।
इन चीजों के लिए दक्षिण दिशा शुभ साबित हो सकती है।
दक्षिणमुखी कार्यालय (ऑफिस)
यदि कार्यालय दक्षिणमुखी है तो कार्यालय के स्वामी को दक्षिण-पश्चिम भाग में बैठकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके कार्य करना शुभ माना जाता है।
इस से नेतृत्व क्षमता, निर्णय शक्ति तथा व्यापारिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
कार्यालय के दक्षिण भाग में रिकॉर्ड रूम, महत्वपूर्ण फाइलें, सेफ या भारी फर्नीचर रखा जा सकता है। उत्तर दिशा को ग्राहकों के स्वागत तथा खुली गतिविधियों के लिए उपयोग करना लाभदायक माना जाता है।
+++
+++
दक्षिणमुखी मोटरसाइकिल शोरूम :
दक्षिणमुखी मोटरसाइकिल शोरूम भी सफल हो सकता है।
शोरूम के भीतर भारी वाहन, स्पेयर पार्ट्स तथा गोदाम दक्षिण या दक्षिण - पश्चिम भाग में रखें। ग्राहकों के बैठने की व्यवस्था उत्तर या पूर्व दिशा में करना शुभ माना जाता है।
कैश काउंटर इस प्रकार रखें कि व्यापारी का मुख उत्तर या पूर्व की ओर रहे।
शोरूम के मुख्य प्रवेश द्वार को सदैव स्वच्छ, प्रकाशित और आकर्षक रखें।
टूटी हुई गाड़ियाँ या कबाड़ मुख्य प्रवेश के सामने नहीं रखना चाहिए।
दक्षिणमुखी दुकान :
दक्षिणमुखी दुकान में भी अच्छा व्यापार संभव है।
दुकानदार यदि दक्षिण - पश्चिम भाग में बैठकर उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके व्यापार करे तो स्थिर आय एवं ग्राहक वृद्धि की संभावना बढ़ती है।
दुकान के दक्षिण भाग में भारी माल, स्टॉक या गोदाम रखा जा सकता है।
उत्तर दिशा को अपेक्षाकृत हल्का तथा खुला रखना लाभदायक माना जाता है।
जन्मकुंडली एवं गोचर का महत्व :
यदि जन्मकुंडली में मंगल, सूर्य, शनि अथवा दशम भाव बलवान हो तो दक्षिणमुखी भवन से लाभ मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
वहीं यदि प्रश्नकुंडली या गोचर में राहु, केतु, शनि अथवा मंगल प्रतिकूल प्रभाव दे रहे हों, तो वास्तु दोष अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
ऐसे समय केवल दिशा बदलना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ग्रह शांति एवं उचित वैदिक उपाय भी आवश्यक होते हैं।
दक्षिणमुखी भवन के लिए आवश्यक नियम :
- दक्षिण दिशा को सदैव स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखें।
- दक्षिण-पश्चिम भाग को मजबूत एवं भारी रखें।
- उत्तर एवं पूर्व दिशा में पर्याप्त प्रकाश और खुलापन रखें।
- दक्षिण दिशा में गड्ढा, जलभराव, टूटी दीवार या कबाड़ न रखें।
- मुख्य प्रवेश द्वार पर स्वच्छता, उचित प्रकाश और शुभ प्रतीकों का ध्यान रखें।
- किसी भी बड़े वास्तु परिवर्तन से पहले जन्मकुंडली एवं प्रश्नकुंडली का परीक्षण अवश्य कराएँ।
लेकिन इसके लिए वास्तु के कुछ अन्य नियमों का ख्याल भी जरूर रखना चाहिए।
वैदिक उपाय :
- प्रतिदिन प्रातः सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
- मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा मंगल ग्रह की शांति हेतु "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" मंत्र का जप करें।
- शनिवार को शनि संबंधित दान, सेवा तथा पीपल वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- पितरों का सम्मान करें तथा अमावस्या पर तर्पण एवं श्राद्ध योग्य विधि से करें।
- घर, दुकान या कार्यालय में नियमित रूप से धूप, दीप एवं सात्त्विक वातावरण बनाए रखें।
अगर आप वास्तु उपाय के साथ यहां कोई काम शुरू कर सकते हैं, तो इससे उत्तम फल की प्राप्ति हो सकती है और वास्तुदोष भी नहीं लगता है।
दक्षिणमुखी घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम अथवा दुकान को केवल दिशा के आधार पर अशुभ नहीं कहा जा सकता।
वैदिक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली तथा वर्तमान गोचर का समन्वित अध्ययन ही सही निर्णय का आधार है।
जब भवन का वास्तु संतुलित हो, ग्रह अनुकूल हों, व्यक्ति धर्म, सत्य और परिश्रम का पालन करे तथा उचित वैदिक उपाय अपनाए जाएँ, तब दक्षिणमुखी भवन भी धन, यश, स्थिरता, सुरक्षा और दीर्घकालीन सफलता का कारण बन सकता है।
यही वैदिक ज्ञान का वास्तविक संदेश है।
घर के बुजुर्ग सदस्यों के लिए बनाएं बेडरूम :
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, श्री खगोलशास्त्र, श्री वास्तुशास्त्र, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण एवं श्री अग्नि पुराण के अनुसार दक्षिणमुखी घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम एवं दुकान में दक्षिण दिशा में बेडरूम या पर्सनल ऑफिस का महत्व, फल, नियम एवं उपाय
माना जाता है कि दक्षिण दिशा में घर के बड़े - बुजुर्गों के लिए शयनकक्ष बनाना शुभ होता है।
वैदिक वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है।
सामान्य धारणा यह है कि दक्षिण दिशा या दक्षिणमुखी भवन अशुभ होते हैं, जबकि शास्त्रीय दृष्टि से यह निष्कर्ष पूर्णतः सही नहीं है।
किसी भी भवन का शुभ या अशुभ फल केवल उसकी दिशा से निर्धारित नहीं होता, बल्कि जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, वर्तमान गोचर, भूमि की प्रकृति, ग्रहों की स्थिति तथा भवन के आंतरिक वास्तु संतुलन पर भी निर्भर करता है।
श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, भविष्य पुराण, नारद पुराण, अग्नि पुराण तथा वास्तुशास्त्र में दिशाओं के संतुलित उपयोग पर विशेष बल दिया गया है।
दक्षिण दिशा स्थिरता, अनुशासन, साहस, कर्मफल तथा सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है।
इस लिए यदि इसका उचित उपयोग किया जाए तो यह जीवन और व्यवसाय दोनों में स्थिर सफलता प्रदान कर सकती है।
साथ ही, बेड का सिरहाना कमरे में दक्षिण दिशा में ही होना चाहिए।
यदि घर, कार्यालय, दुकान या मोटरसाइकिल शोरूम दक्षिणमुखी हो, तो दक्षिण अथवा दक्षिण - पश्चिम भाग में बेडरूम या पर्सनल ऑफिस ( व्यक्तिगत कार्यकक्ष ) बनाया जा सकता है।
वास्तुशास्त्र में यह स्थान विशेष रूप से घर के मुखिया, व्यवसाय के स्वामी अथवा निर्णय लेने वाले व्यक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
+++
+++
दक्षिण दिशा में बेडरूम का फल :
घर के मुखिया का शयनकक्ष यदि दक्षिण या दक्षिण - पश्चिम दिशा में हो और जन्मकुंडली भी उसका समर्थन करती हो, तो परिवार में स्थिरता, निर्णय क्षमता, सम्मान तथा आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है। पति - पत्नी के संबंधों में परिपक्वता, जिम्मेदारी तथा विश्वास बना रहता है।
किन्तु इस दिशा का उपयोग बच्चों के अध्ययन कक्ष या छोटे बच्चों के शयनकक्ष के रूप में सामान्यतः उपयुक्त नहीं माना जाता।
ऐसे मामलों में जन्मकुंडली के अनुसार निर्णय लेना अधिक उचित होता है।
बेडरूम में पलंग इस प्रकार रखें कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रहे।
इस से मानसिक शांति, स्वास्थ्य तथा अच्छी नींद प्राप्त होने की मान्यता है।
दक्षिण दिशा में पर्सनल ऑफिस :
यदि घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान में दक्षिण दिशा में व्यक्तिगत कार्यालय बनाया जाए, तो उस कक्ष में बैठने वाले व्यक्ति का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।
इस से निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास, प्रशासनिक शक्ति तथा व्यापारिक सफलता में वृद्धि हो सकती है।
पर्सनल ऑफिस में महत्वपूर्ण दस्तावेज, अनुबंध, गोपनीय फाइलें तथा व्यवसाय संबंधी योजनाएँ सुरक्षित रखी जा सकती हैं।
दक्षिण दिशा स्थिरता प्रदान करने वाली मानी जाती है, इसलिए लंबे समय की योजनाओं के लिए यह स्थान उपयोगी माना जाता है।
ऐसा करने से अच्छी नींद आती और अनिद्रा की समस्या से राहत मिल सकती है।
मोटरसाइकिल शोरूम में दक्षिण दिशा का उपयोग
यदि शोरूम दक्षिणमुखी है, तो उसके दक्षिण या दक्षिण - पश्चिम भाग में मालिक का निजी कार्यालय बनाया जा सकता है।
यहाँ से पूरे शोरूम पर निगरानी रखना सरल होता है।
कैश काउंटर इस प्रकार रखें कि व्यापारी का मुख उत्तर या पूर्व की ओर रहे।
दक्षिण दिशा में भारी स्टॉक, स्पेयर पार्ट्स तथा रिकॉर्ड रखना शुभ माना जाता है।
टूटी हुई गाड़ियाँ या कबाड़ दक्षिण दिशा में भी लंबे समय तक जमा नहीं रखना चाहिए।
दुकान में दक्षिण दिशा का उपयोग :
दुकान का मालिक दक्षिण - पश्चिम भाग में बैठकर उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके व्यापार करे तो ग्राहकों का विश्वास बढ़ने तथा व्यापार में स्थिरता आने की संभावना मानी जाती है।
दक्षिण दिशा में भारी माल, तिजोरी ( जिसका द्वार उत्तर की ओर खुले ), लेखा - जोखा तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
दुकान के उत्तर और पूर्व भाग को स्वच्छ, खुला और आकर्षक रखना लाभदायक माना जाता है।
जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर का महत्व
वास्तु का निर्णय केवल दिशा देखकर नहीं करना चाहिए।
यदि जन्मकुंडली में मंगल, सूर्य, शनि या दशम भाव बलवान हों, तो दक्षिण दिशा अधिक शुभ फल दे सकती है।
यदि प्रश्नकुंडली किसी विशेष समय में दक्षिण दिशा से लाभ का संकेत दे रही हो, तो उसी अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
यदि वर्तमान गोचर में शनि, राहु, केतु या मंगल प्रतिकूल प्रभाव दे रहे हों, तो वास्तु दोष अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
ऐसे समय योग्य वैदिक ज्योतिषी से परामर्श लेकर ग्रह शांति तथा वास्तु उपाय करना उचित माना जाता है।
साथ ही, दक्षिण दिशा में सिरहाना रखने से आसपास का माहौल भी सकारात्मकता बना रहता है और रात में सोते समय शांति महसूस होती है।
आवश्यक नियम :
- दक्षिण दिशा सदैव स्वच्छ, मजबूत और व्यवस्थित रखें।
- दक्षिण-पश्चिम भाग में भारी फर्नीचर या अलमारी रखें।
- बेडरूम में सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर करके सोएँ।
- पर्सनल ऑफिस में बैठते समय मुख उत्तर या पूर्व की ओर रखें।
- दक्षिण दिशा में गड्ढा, रिसाव, कूड़ा-कचरा या टूटी वस्तुएँ न रखें।
- उत्तर और पूर्व दिशा को अधिक खुला तथा प्रकाशयुक्त रखें।
वैदिक उपाय :
- प्रतिदिन भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।
- मंगलवार को हनुमानजी की उपासना करें तथा मंगल मंत्र का जप करें।
- शनिवार को शनि देव की पूजा एवं दान करें।
- अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण एवं स्मरण करें।
- घर, कार्यालय और दुकान में नियमित रूप से धूप, दीप एवं सात्त्विक वातावरण बनाए रखें।
- किसी भी बड़े वास्तु परिवर्तन से पहले जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली तथा वर्तमान गोचर का सम्यक् परीक्षण अवश्य कराएँ।
वैदिक वास्तु और ज्योतिष के अनुसार दक्षिणमुखी घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम अथवा दुकान में दक्षिण दिशा का उपयोग बेडरूम या पर्सनल ऑफिस के रूप में किया जा सकता है, बशर्ते भवन का समग्र वास्तु संतुलित हो तथा जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और वर्तमान गोचर भी उसका समर्थन करते हों।
सही दिशा में बैठना, उचित स्थान पर शयन करना, स्वच्छता बनाए रखना तथा ग्रहों के अनुसार वैदिक उपाय करना व्यक्ति को स्थिरता, प्रतिष्ठा, आर्थिक उन्नति, निर्णय क्षमता और दीर्घकालीन सफलता प्रदान करने में सहायक माना गया है।
+++
+++
घर की दक्षिण दिशा में क्या रखें और क्या न रखें ?
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री वास्तुशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री भविष्य पुराण, श्री नारद पुराण एवं श्री अग्नि पुराण के अनुसार दक्षिणमुखी घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम एवं दुकान में दक्षिण दिशा में क्या रखें, क्या न रखें, उसका फल, नियम एवं उपाय !
वैदिक वास्तुशास्त्र में प्रत्येक दिशा का अपना विशिष्ट महत्व है।
दक्षिण दिशा को यमदेव की दिशा माना गया है तथा यह कर्म, अनुशासन, सुरक्षा, स्थिरता और जीवन के उत्तरदायित्वों का प्रतीक मानी जाती है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार दक्षिण दिशा का प्रभाव केवल भवन की दिशा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, वर्तमान गोचर, ग्रहों की शक्ति तथा भूमि और भवन के वास्तु संतुलन पर भी आधारित होता है।
इस लिए किसी भी दिशा को बिना संपूर्ण विचार के शुभ या अशुभ नहीं कहा जा सकता।
यदि घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम या दुकान दक्षिणमुखी हो, तो दक्षिण दिशा का उचित उपयोग अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
सही वस्तुओं का चयन एवं उचित व्यवस्था व्यक्ति के जीवन और व्यवसाय में स्थिरता तथा उन्नति ला सकती है।
वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका ख्याल रखने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है।
दक्षिण दिशा में भूलकर भी घड़ी नहीं रखना चाहिए।
दक्षिण दिशा में क्या रखें ?
दक्षिण दिशा में भारी एवं स्थायी वस्तुएँ रखना शुभ माना गया है।
इस दिशा में मजबूत लकड़ी या लोहे की अलमारी, महत्वपूर्ण दस्तावेज, व्यापारिक रिकॉर्ड, भारी फर्नीचर, मशीनरी तथा गोदाम का सामान रखा जा सकता है।
यदि घर है तो परिवार के मुखिया का शयनकक्ष दक्षिण या दक्षिण - पश्चिम भाग में रखा जा सकता है।
दुकान अथवा मोटरसाइकिल शोरूम में दक्षिण दिशा में स्पेयर पार्ट्स, भारी स्टॉक, उपकरण तथा सुरक्षित भंडारण रखा जा सकता है।
कार्यालय में इस दिशा में रिकॉर्ड रूम, फाइल कैबिनेट तथा वरिष्ठ अधिकारी का कक्ष रखना लाभदायक माना जाता है।
यदि तिजोरी दक्षिण दिशा में रखी जाए तो उसका द्वार उत्तर की ओर खुलना अधिक शुभ माना जाता है। इससे धन की स्थिरता का प्रतीकात्मक संकेत माना जाता है।
दक्षिण दिशा में क्या नहीं रखें?
दक्षिण दिशा में गड्ढा, भूमिगत पानी की टंकी, कुआँ, बोरवेल, लगातार जलभराव या रिसाव सामान्यतः उचित नहीं माना जाता।
इस से वास्तु संतुलन प्रभावित होने की मान्यता है।
इस दिशा में कूड़ा - कचरा, टूटी हुई कुर्सियाँ, खराब मशीनें, बंद घड़ियाँ, टूटे शीशे, अनुपयोगी वाहन, जंग लगा सामान या वर्षों से पड़ा कबाड़ नहीं रखना चाहिए।
ऐसी वस्तुएँ नकारात्मकता, अव्यवस्था और मानसिक तनाव का कारण मानी जाती हैं।
पूजा घर, तुलसी का स्थान या निरंतर जल तत्व रखने के लिए भी दक्षिण दिशा सामान्यतः उपयुक्त नहीं मानी जाती।
इन के लिए उत्तर - पूर्व दिशा को अधिक श्रेष्ठ माना गया है।
इस से घर के मुखिया की आयु पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
इस के अलावा, फ्रिज भी इस दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि, यह दिशा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।
जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली का महत्व :
हर व्यक्ति के लिए एक ही वास्तु नियम समान फल नहीं देता।
यदि जन्मकुंडली में मंगल, सूर्य या शनि शुभ एवं बलवान हों तो दक्षिण दिशा अधिक अनुकूल परिणाम दे सकती है।
यदि प्रश्नकुंडली किसी विशेष कार्य के लिए दक्षिण दिशा से सफलता का संकेत देती हो तो उसी के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
यदि गोचर में राहु, केतु, शनि या मंगल प्रतिकूल प्रभाव दे रहे हों, तो दक्षिण दिशा की स्वच्छता और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा आवश्यक वैदिक उपाय करने चाहिए।
+++
+++
दक्षिण दिशा के शुभ फल :
यदि दक्षिण दिशा संतुलित और व्यवस्थित हो तो—
- परिवार में स्थिरता बनी रहती है।
- व्यापार में दीर्घकालीन लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है।
- निर्णय क्षमता और नेतृत्व शक्ति में वृद्धि हो सकती है।
- धन की रक्षा और संपत्ति में स्थिरता आती है।
- कार्यक्षेत्र में सम्मान और अधिकार बढ़ सकता है।
- अनावश्यक विवाद और अस्थिरता में कमी आती है।
दक्षिण दिशा के नियम :
- दक्षिण दिशा को सदैव स्वच्छ, सूखी और व्यवस्थित रखें।
- इस भाग को उत्तर दिशा की तुलना में अधिक भारी रखें।
- दीवारें मजबूत और अच्छी स्थिति में रखें।
- टूटे सामान और कबाड़ को तुरंत हटाएँ।
- पर्याप्त प्रकाश और नियमित सफाई बनाए रखें।
- बड़े वास्तु परिवर्तन से पहले जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर का विचार अवश्य करें।
अलमारी या तिजोरी दक्षिण दिशा में रखने से धन की हानि हो सकती है।
हालांकि, अपने घर के भीतर दक्षिण दिशा में आप भारी सामान रख सकते हैं।
वैदिक उपाय :
यदि दक्षिण दिशा से संबंधित दोष अनुभव हो रहे हों, तो निम्न उपाय किए जा सकते हैं—
- प्रतिदिन प्रातः सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
- मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा मंगल ग्रह के मंत्र का जप करें।
- शनिवार को शनि देव की पूजा, तिल का दान एवं सेवा कार्य करें।
- अमावस्या पर पितरों का तर्पण एवं स्मरण करें।
- घर, कार्यालय और दुकान में नियमित रूप से धूप, दीप तथा सात्त्विक वातावरण बनाए रखें।
- किसी भी वास्तु उपाय को जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और वर्तमान गोचर के अनुरूप ही अपनाएँ।
इस स्थान पर स्टोर रूम, बेड की सिरहाना, भारी वजन वाली वस्तुएं आदि रख सकते हैं।
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, खगोलशास्त्र, वास्तुशास्त्र तथा वैदिक परंपरा का मूल संदेश यह है कि दक्षिण दिशा न तो अपने आप में पूर्णतः शुभ है और न ही पूर्णतः अशुभ।
उसका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, ग्रहों के गोचर, भवन की संरचना तथा जीवनचर्या पर निर्भर करता है।
दक्षिण दिशा में भारी, उपयोगी और स्थायी वस्तुएँ रखना, स्वच्छता बनाए रखना तथा जल, कबाड़ और टूटी वस्तुओं से बचना सामान्यतः हितकारी माना गया है।
जब वास्तु नियम, ग्रहों की अनुकूलता और धर्मयुक्त आचरण एक साथ जुड़े होते हैं, तभी घर, कार्यालय, मोटरसाइकिल शोरूम और दुकान में सुख, समृद्धि, स्थिरता तथा उन्नति के श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त होते हैं।
ऐसा करने से जीवन में सुख - समृद्धि बनी रहती है।
+++
+++
+++
+++





