वैदिक वास्तु शास्त्र :
किचन में सिंक और गैस स्टोव आमने सामने होने पर क्या करें ?
रसोईघर में सिंक और गैस स्टोव आमने - सामने होने का वास्तु - दोष, कारण, प्रभाव एवं शास्त्रीय उपाय !
भारतीय परंपरा में रसोईघर को केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं माना गया है, बल्कि इसे घर की अग्नि - शक्ति, स्वास्थ्य, अन्न-समृद्धि और पारिवारिक ऊर्जा से जोड़ा गया है।
वैदिक ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, पंचतत्त्व - विचार तथा पारंपरिक गृह - विन्यास में अग्नि और जल के संतुलन को विशेष महत्व दिया गया है।
इसी कारण जब रसोई में गैस स्टोव और सिंक एक - दूसरे के बिल्कुल सामने अथवा बहुत निकट स्थित हों, तो पारंपरिक वास्तु - दृष्टि से इसे जल और अग्नि के बीच असंतुलन की स्थिति माना जाता है।
यह समझना आवश्यक है कि केवल सिंक और गैस का आमने - सामने होना अपने - आप में किसी व्यक्ति के जीवन में निश्चित घटना का कारण सिद्ध नहीं करता।
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| { Brand | Havok |
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| Product Dimensions | 27D x 24.5W x 12H Centimeters |
| Material | Acrylonitrile Butadiene Styrene (ABS) |
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| Capacity | 1.5 litres |
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| Model Name | HAV.MIX.JAR.4 } |
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वास्तु में परिणाम का विचार पूरे घर की दिशा, रसोई का स्थान, प्रवेश, ब्रह्मस्थान, जल - निकास, अग्निकोण तथा रहने वालों की जन्मकुंडली आदि को साथ देखकर किया जाता है।
इस लिए इसे वास्तु - सिद्धांत के रूप में समझना अधिक उचित है, न कि हर परिस्थिति में निश्चित भविष्यवाणी के रूप में।
अधिकतर घरों की किचन में गैस स्टोव और सिंक आमने सामने है तो यह वास्तु गोष बन सकता है।
ऐसे में बिना तोड़ फोड़ के आप कुछ सरल उपाय करने से आप इसी ठीक कर सकते हैं।
आइए जानते हैं वास्तु एकस्पर्ट से किचन में गैस स्टोव और सिंक आमने सामने होने का घर पर प्रभाव और उपाय।
क्या आपका किचन में गैस स्टोव और सिंक एक दूसरे का आमने सामने हैं।
अगर ऐसा है तो यह वास्तु शास्त्र के अनुसार, सही नहीं है।
वैदिक वास्तु शास्त्र के अनुसार, फायर एलिमेंट और वॉटर एलिमेंट का आमने सामने होने ऊर्जा का टकराव माना जाता है।
किचर में गैस स्टोव और सिंक का आमने सामने होने दो तत्वों की लड़ाई को दर्शाता है।
ऐसा होने से घर परिवार में कैलश अधिक होता है साथ ही स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
अगर आपके घर में भी ऐसा सेटअप है तो आप इसे बिना तोड़ फोड़ के ठीक कर सकते हैं।
आइए जानते हैं इसे ठीक करने से सरल उपाय।
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जल और अग्नि का मूल सिद्धांत :
वैदिक वास्तु शास्त्र - विचार में पाँच महाभूत— पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — घर की ऊर्जा - संरचना से संबंधित माने जाते हैं।
रसोई में गैस स्टोव अग्नि - तत्त्व का प्रतिनिधि माना जाता है, जबकि सिंक जल - तत्त्व से संबंधित है।
अग्नि का स्वभाव उष्ण, परिवर्तनकारी और सक्रिय है, जबकि जल का स्वभाव शीतल, प्रवाही और शांत माना जाता है।
इस लिए दोनों तत्त्वों को बिना उचित अंतर या संतुलन के रखने से पारंपरिक वास्तु में जल - अग्नि विरोध की स्थिति मानी जाती है।
यदि सिंक और गैस स्टोव आमने - सामने हों, तो एक ओर जल और दूसरी ओर अग्नि की सीधी स्थिति बनती है।
वास्तु के अनुसार यह रसोई की ऊर्जा में संघर्ष का संकेत माना जा सकता है।
इसे कौन - सा दोष कहा जाता है ?
ऐसी स्थिति को सामान्यतः जल - अग्नि दोष, जल - अग्नि विरोध या जल - अग्नि असंतुलन के रूप में समझाया जाता है।
इसे किसी एक सार्वभौमिक शास्त्रीय नाम से हर वास्तु - पद्धति में समान रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
दोष की गंभीरता निर्धारित करने के लिए केवल सिंक और स्टोव को देखना पर्याप्त नहीं है।
रसोई किस दिशा में है, स्टोव किस दिशा की ओर है, सिंक किस दिशा में है, रसोई का द्वार कहाँ है, घर का मुख्य द्वार कहाँ है और घर में जल का मुख्य स्रोत किस स्थान पर है—
इन सभी बातों का विचार आवश्यक है।
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| Material | Copper |
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| Brand | CROCKERY WALA & COMPANY |
| Product Dimensions } | 28D x 28W x 18H Centimeters |
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इसका कारण क्या माना जाता है ?
पारंपरिक वास्तु - दृष्टि में अग्नि और जल को परस्पर विरोधी तत्त्व माना जाता है।
गैस स्टोव पर अग्नि उत्पन्न होती है और सिंक में जल का उपयोग तथा निकास होता है।
जब दोनों बिल्कुल सामने होते हैं, तो प्रतीकात्मक रूप से जल और अग्नि की शक्तियाँ आमने - सामने आ जाती हैं।
किचन में गैस स्टोव और सिंक के आमने सामने हो तो क्या उपाय करें ?
1) वैदिक वास्तु शास्त्र मान्या कहती है कि अपने गैस स्टोव और सिंक के बीच में एक पार्टिशन जरूर लगाएं।
इस के लिए आप ग्रेनाइट या गलास शिल्ड या फिर वुडन डिवाइडर लगा सकते सकते हैं।
ऐसे बैरियर लगाने से आग और पानी के सीधे टकराव को यह रोक देता है।
2) गैस स्टोव और सिंक के बीच में कम से कम 3 फीट की दूरी जरुर होली चाहिए।
अगर दोनों एक दूसरे का आमने सामने हैं तो उन दोनों के बीच में एक रग डाल दें ताकी सीधी जा रही ऊर्जा को बीच में रोका जा सकें।
3) खाना बनाते समय आपका मुंह हमेशा उत्तर दिशा में होने चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा का बहाव हो सकें।
4) वैदिक वास्तु शास्त्र मान्या कहती है कि गैस और पानी की दुश्मनी को खत्म करने के लिए दोनों के बीच में हरा रंग लगाएं।
आप चाहें तो दोनों के बीच में मनी प्लांट रख सकते हैं।
साथ ही आप चाहें तो हरे रंग की मेट भी बिछा सकते है।
5) गैस स्टोव के आसपास स्टील या लोहे की चीजें कम से कम रखें. इसकी जगह लकड़ी की चम्मच, मिट्टी के बर्तन या सैरेमिक के डिब्बे रख सकते हैं।
यह नकारात्मक ऊर्जा को कम करते हैं।
6) वैदिक वास्तु शास्त्र कहती है कि इसी के साथ रसोई की दीवारों पर भी सही रंग का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।
रसोई की दीवारों पर हल्का पीले रंग, या बेज रंग कराएं।
भूलकर भी रसोई में काला रंग, गहरा नीला रंग या एकदम लाल रंग न कराएं।
क्योंकि, इस तरह के रंग दीवारों पर कराने से घर परिवार में झगड़ा और परिवार के सदस्यों के बीच तालमेल की कमी हो सकती है।
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इस स्थिति को कुछ वास्तु - परंपराओं में निम्न प्रकार के असंतुलन से जोड़ा जाता है—
1. घर में मानसिक अशांति बढ़ना।
2. परिवार के सदस्यों में छोटी-छोटी बातों पर मतभेद।
3. रसोई से संबंधित बार-बार समस्या उत्पन्न होना।
4. भोजन और स्वास्थ्य के विषय में असंतुलन की अनुभूति।
5. धन के आने के साथ खर्च भी बढ़ने की स्थिति।
6. घर के वातावरण में चिड़चिड़ापन या तनाव महसूस होना।
7. गृहिणी अथवा रसोई का अधिक उपयोग करने वाले व्यक्ति को मानसिक थकान महसूस होना।
लेकिन इन परिणामों को निश्चित फल नहीं मानना चाहिए।
वैदिक वास्तु शास्त्र - परंपरा में भी परिणाम अन्य दिशात्मक दोषों और घर की संपूर्ण संरचना पर निर्भर माने जाते हैं।
वैदिक ज्योतिष में अग्नि और जल के संबंध को ग्रहों और राशियों के माध्यम से भी देखा जाता है।
उदाहरण के लिए सूर्य और मंगल अग्नि - तत्त्व से, जबकि चंद्रमा और शुक्र को जल - प्रधान प्रकृति से जोड़ने वाली पारंपरिक व्याख्याएँ मिलती हैं।
लेकिन केवल इन ग्रहों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि रसोई में सिंक और गैस आमने - सामने होने से निश्चित रूप से अमुक घटना होगी।
जन्मकुंडली में चतुर्थ भाव, चतुर्थेश, मंगल, चंद्रमा, शुक्र तथा गृह - सुख से संबंधित योगों का विचार किया जा सकता है।
यदि गृह - सुख संबंधी भाव या ग्रह पहले से पीड़ित हों और साथ में वास्तु में जल - अग्नि असंतुलन भी हो, तो पारंपरिक ज्योतिष - वास्तु दृष्टि से उस स्थान को सुधारना अधिक महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
प्रश्नकुंडली और गोचर से विचार :
यदि कोई व्यक्ति विशेष रूप से यह प्रश्न पूछता है कि घर की रसोई में बार - बार समस्या क्यों उत्पन्न हो रही है, तो प्रश्नकुंडली की परंपरा में लग्न, चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा संबंधित ग्रहों का अध्ययन किया जा सकता है।
गोचर में मंगल, शनि, राहु, केतु, गुरु और चंद्रमा की स्थिति को भी प्रश्न के संदर्भ में देखा जा सकता है।
परंतु गोचर को वास्तु - दोष का अकेला प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
अर्थात् सही पद्धति यह होगी कि वास्तु - विन्यास + जन्मकुंडली + प्रश्नकुंडली + वर्तमान गोचर को अलग - अलग स्तर पर देखकर निष्कर्ष निकाला जाए।
सिंक और गैस स्टोव आमने - सामने होने मात्र से कोई विशेष पूजा हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है।
वास्तु में सबसे पहला उपाय स्थान का व्यावहारिक सुधार माना जाना चाहिए।
यदि रसोई का पुनर्विन्यास संभव हो, तो गैस और सिंक के बीच उचित दूरी रखना सबसे सरल उपाय है।
दोनों को बिल्कुल आमने - सामने रखने के बजाय उनके बीच काउंटर, प्लेटफॉर्म या अन्य कार्य - स्थान बनाया जा सकता है।
इससे जल और अग्नि के बीच सीधा सामना कम होता है।
यदि मकान किराए का हो अथवा निर्माण ऐसा हो कि स्टोव और सिंक को स्थानांतरित करना संभव न हो, तब पारंपरिक वास्तु - उपायों का सहारा लिया जा सकता है।
सबसे पहले गैस स्टोव और सिंक के बीच पर्याप्त कार्य - स्थान रखने का प्रयास करें।
यदि संभव हो तो दोनों के बीच लकड़ी का काउंटर, पत्थर का प्लेटफॉर्म या अन्य स्थायी विभाजन रखें।
सिंक के आसपास अनावश्यक पानी जमा न रहने दें।
गैस स्टोव के पास पानी की बाल्टी, बड़े जल - पात्र अथवा अनावश्यक जल - संग्रह न रखें।
गैस स्टोव हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
रसोई में टूटे हुए बर्तन, खराब गैस उपकरण या लंबे समय से अनुपयोगी वस्तुएँ जमा न करें।
रसोई में पर्याप्त प्रकाश और वायु - संचार रखें।
जल का रिसाव, नल का टपकना या सिंक का जाम रहना तुरंत ठीक करवाएँ।
यदि परिवार अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार आध्यात्मिक उपाय करना चाहता है, तो रसोई की नियमित स्वच्छता के साथ अग्नि देवता और अन्नपूर्णा माता का स्मरण किया जा सकता है।
भोजन बनाने से पहले श्रद्धापूर्वक ईश्वर का स्मरण करें।
नियमित रूप से घर के देवस्थान में दीपक जलाएँ।
अन्न का सम्मान करें और भोजन को व्यर्थ न जाने दें।
परिवार की परंपरा के अनुसार श्री अन्नपूर्णा माता, अग्निदेव या इष्टदेव की पूजा की जा सकती है।
किसी भी पूजा को भय के कारण नहीं, बल्कि श्रद्धा, सकारात्मकता और मानसिक शांति के लिए करना अधिक उचित है।
रसोई में कौन - से नियम रखें ?
रसोई को हमेशा साफ और सूखा रखना चाहिए।
सिंक और गैस के बीच अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए।
खाना बनाने के बाद गैस बंद होने की पुष्टि करनी चाहिए।
जल - निकास की व्यवस्था ठीक रखनी चाहिए।
रसोईघर में टूटे हुए शीशे, जले हुए बर्तन, खराब उपकरण और कूड़ा लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए।
वास्तु के साथ - साथ अग्नि - सुरक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गैस पाइप, रेगुलेटर, सिलेंडर और विद्युत उपकरणों की नियमित जाँच करवाना वास्तु - उपाय से कहीं अधिक व्यावहारिक और आवश्यक है।
इस का प्रभाव किस पर अधिक माना जाता है ?
परंपरागत वास्तु में रसोईघर का संबंध पूरे परिवार के स्वास्थ्य और गृहस्थ जीवन से जोड़ा जाता है।
इस लिए किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरे घर के वातावरण पर इसका प्रभाव माना जाता है।
फिर भी वास्तविक ज्योतिषीय विश्लेषण में यह देखा जाएगा कि घर में कौन व्यक्ति अधिक समय रसोई में बिताता है, उसकी जन्मकुंडली में चतुर्थ भाव की स्थिति कैसी है तथा मंगल और चंद्रमा आदि ग्रहों की स्थिति कैसी है।
इस लिए बिना जन्म विवरण और बिना वास्तु - नक्शा देखे किसी व्यक्ति के लिए निश्चित फल कहना उचित नहीं है।
उपाय करने से क्या फल माना जाता है ?
वास्तु - सुधार का उद्देश्य केवल किसी कथित दोष को समाप्त करना नहीं, बल्कि घर में व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और संतुलन स्थापित करना भी है।
सिंक और गैस के बीच उचित दूरी बनाने से जल और अग्नि का सीधा सामना कम होता है।
स्वच्छ रसोई से सकारात्मक वातावरण बनता है।
जल - रिसाव रोकने से व्यावहारिक नुकसान कम होता है।
गैस और विद्युत उपकरणों की उचित देखभाल से सुरक्षा बढ़ती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से पूजा और मंत्र - जप व्यक्ति को मानसिक शांति, श्रद्धा और सकारात्मक भाव दे सकते हैं।
निष्कर्ष :
रसोई में सिंक और गैस स्टोव का बिल्कुल आमने - सामने होना पारंपरिक वास्तु - विचार में मुख्यतः जल - अग्नि असंतुलन के रूप में देखा जाता है।
इसे हर परिस्थिति में भयंकर या निश्चित दोष मानना उचित नहीं है।
सबसे पहला उपाय है—
सिंक और गैस के बीच दूरी या प्लेटफॉर्म बनाना, जल - रिसाव रोकना, रसोई को स्वच्छ रखना और अग्नि - सुरक्षा के नियमों का पालन करना।
इस के बाद यदि परिवार धार्मिक परंपरा का पालन करता है तो इष्टदेव, अन्नपूर्णा माता या अग्निदेव का श्रद्धापूर्वक स्मरण एवं पूजा की जा सकती है।
और यदि किसी विशेष घर में लगातार स्वास्थ्य, गृहकलह, आर्थिक परेशानी अथवा अन्य समस्या अनुभव हो रही हो, तो केवल सिंक और गैस देखकर निर्णय न लेकर घर की पूर्ण वास्तु - स्थिति तथा संबंधित व्यक्ति की जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली और गोचर का समन्वित अध्ययन करना चाहिए।
इस प्रकार वास्तु का मूल उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि पंचतत्त्वों में संतुलन, गृहस्थ जीवन में व्यवस्था और घर में सुख-शांति की स्थापना करना माना जाना चाहिए।
🌸 जल और अग्नि दोनों जीवन के लिए आवश्यक हैं; वास्तु का संदेश दोनों को विरोधी बनाना नहीं, बल्कि उचित स्थान और संतुलन देना है। 🙏🏻 हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!!
🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
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JAM KHAMBHALIYA - 361305 (GUJRAT )
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏